परिवर्तन

मंथन कर मन के सागर का, तृष्णाओ का विष निगलूँगा, बन कर नया सूर्य, अब मै नित निकलूँगा, मै ना कोई, भजन करूंगा, करूंगा तो सिर्फ, प्रयत्न करूंगा, तुमको चलना है, तो चलो, सीधी...

मन की पीर

मन की पीर ना समझे है, समझे है ना बात मेरी नैना छलक के कह गए, छलकी ना मगर याद तेरी कतरा-कतरा बूंद ओस की, बुझाएगी...

मान

मेरे टुकड़े करके, दंभ भरते है कभी भाषा, कभी जात पर लड़ते है कैसा है मान, जो कानो मे शीशे भरता है मेरे आचल से तो, अब...

तेरा नाम

मेरे मन मे, तेरा नाम है तू ही खुदा, तू ही राम है फूलो मे तू, तारो मे तू कण-कण मे तू, हर नज़ारे मे तू तू ही...

सलाम

चढ़ते सूरज को करे सलाम, कैसी तेरी फितरत जहान जो ना ढलता मै,तो क्या होती हंसी शाम क्या ये तारो का मंजर होता या होती घर लोटने...

खारा

ये जो दरिया है, ये सारे का सारा, खारा क्यों है हमको आज भी, तेरा हर एक गम, गवारा क्यों है किये थे जो, झूटे वादे,...

कैसे

टूटे हुए तारो को , बे घर बंजारों को कैसे आंसू अर्पण कर दूँ, महकते गुलजारों को ढलती हुई शाम को, अधूरे जाम को कैसे नाम कर...

पाप

हर शक्स चेहरा बदलने लगा है अब तो शहर भी जलने लगा है जाने कब थमेगी नफरत की आग रगों मे जहर पलने लगा है खेल रही है...

समझोते

जो ना होते ये समझोते,तो क्या खोता मै तुमको ना चाहता, तो भी तनहा होता मै आज भी है, मेरे जेहन मे, तेरे पहलु से गिरते,...

मन उलझा

जाने किस अंधियारे मे, मन उलझा है सुलझे तो ना उलझे, बात कोई जलने वाले से ना पूछो, के तपिश कितनी है जानना है तो, जलके देखो...

गम

उड़ते हुए धुए से ना पूछो, के क्या गम है इसमें है जैसे, तेरा ही अक्श घुला हुआ शहरों की खाक लपेटे हुए, चलता हूँ तनहा उस...

तुझ बिन

झूठा चाँद ये झूठे तारे, तुझ बिन बरसाए अंगारे सुने ख्वाब दिल जलाये, क्यूकर मैंने ये सपने सजाये आस भरी रंगोली फेली, दुनिया हो गई है...

दिल जला था…

*हाथो की लकीरे खुद ही कैसे मिटाइए, जो ना समझे पीर दिल की उससे दिल क्या लगाइए * ********** जब से चला था, तब से छला...

मन मंथन

करता है क्यों मन विभाजित श्रापित सपनो के मंथन से कभी तो निकलेगा दुवेश क्लेश के बंधन से प्रयत्न से कटेगे कष्ट ,कष्ट से अनुभव होगा मन...

मन बंधन

मन बंधन के तोड़ दे ताले जाने किस ताल खिले उजाले चल गर्दिश को दे भुला थोडा होश तो संभाले... चलती नाव मे कील क्यों ठोके जब दिखने लगे...

जय भारती

हमने कहा तो उग्रवाद तुमने कहा तो क्रांति सफ़ेद लिबादे मे बंद है जाने कितनी भ्रान्ति मारा गया था जो वो था बेगुनाह गुनाहगारो के है सियासत्दार सारथी किसानो के...